इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार आगामी 8 नवंबर को होने वाले दीक्षांत समारोह की तैयारियों में लगा हुआ है। इन सभी प्रकियाओं के बीच एक मामला लगातार चल रहा था जिसमे एक परास्नातक अर्थशास्त्र विभाग के छात्र ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन से पदक वितरण प्रणाली में अनियमितता की बात बताकर स्पष्टीकरण मांगा था लेकिन छात्र को अधिकारियों से असंतुष्ट जवाब व निराशा प्राप्त हुई और लिहाजा छात्र ने कोर्ट के दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने लिया त्वरित संज्ञान, पाँच कार्यदिवसों में हुईं तीन हियरिंग
परास्नातक अर्थशास्त्र के छात्र अभिषेक कुमार सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुये मा. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परास्नातक प्रथम वर्ष में प्रमोशन के आधार पर दिये जा रहे पदकों को प्रथम दृष्टया में दोषपूर्ण, आधारहीन और अकादमिक मानकों के विरुद्ध माना है। मा. हाइकोर्ट की सिंगल बेंच ने सुनवाई करते हुये "अभिषेक कुमार सिंह बनाम कुलपति इलाहाबाद विश्वविद्यालय और चार अन्य" के मुकद्दमें में विश्वविद्यालय के पक्ष से असंतुष्टि जाहिर करते हुये कुछ तर्कों के ज़वाब भी माँगे है जो निम्नवत है :-
1) प्रो० पी०डी० हजेला स्वर्ण पदक और दर्शनशास्त्र और संस्कृत परास्नातक में दिये जा रहे पदकों के मानक तर्कहीन और दोषपूर्ण हैं
2) अलग अलग विभाग में नम्बर और ग्रेड को आधार बनाया असामानता का द्योतक है
3) सामान्य प्रोन्नति में यूजीसी की एक्सपर्ट कमेटी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की अवहेलना क्यों हुई?
4) विश्वविद्यालय के प्रमोशन के पक्ष में बताये गये आधार उसकी तरफ से प्रस्तुत दस्तावेजों के उलट हैं
5) सहूलियत के अनुसार कोई भी मानक नहीं बन सकते
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तीन सुनवाई में ही एयू ने बदले तीन वकील
छात्र अभिषेक ने हमारे टीम से बात करते हुए बताया कि "यह बात जानकर आपको हैरानी होगी कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय को तीन सुनवाई में दो बार तारीख लेनी पड़ी, तीन बार वकील बदलने पडे़। यहाँ तक कि रजिस्ट्रार को तलब करने पर सीनियर एडवोकेट से तारीख आगे बढ़ाने की दर्खास्त करनी पड़ी। हाईकोर्ट ने ऐन मौके पर परीक्षा नियंत्रक बदलने, आंतरिक मूल्यांकन की गलत जानकारी देने और स्पष्टीकरण न देने पर तीखी फटकार भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन को लगाई।"